चंदन (Santalum album): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ
Santalum album
चंदन (Santalum album) एक अर्ध-परजीवी पेड़ है, जो पास लगे साथी (होस्ट) पौधे के बिना नहीं उग सकता। जानिए सही साथी पौधे के साथ इसे कैसे लगाएँ, राजस्थान समेत भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कैसे पहचानें और लाल चंदन से कैसे अलग करें, पहले तीन साल की देखभाल, और क़ानून व चोरी से जुड़ी सावधानियाँ।
लाभ
फ़ायदे
चंदन की असली क़ीमत इसकी ख़ुशबूदार अंदरूनी लकड़ी और तेल में है, लेकिन बढ़ता हुआ पेड़ पक्षियों को भोजन भी देता है, फ़सलों को हवा से बचाता है और पत्तियों से मिट्टी को खाद लौटाता है।
ख़ुशबू और नक्काशी. ICRAF के अनुसार अंदरूनी लकड़ी से निकाला गया चंदन का तेल इत्र और साबुन में इस्तेमाल होता है, अंदरूनी लकड़ी का पाउडर अगरबत्ती और लेप में जाता है, और इसकी बारीक दानेदार अंदरूनी लकड़ी नक्काशी के लिए बहुत क़ीमती मानी जाती है।
पक्षी, हवा से बचाव और मिट्टी. ICRAF के अनुसार पक्षी इसके फल खाकर बीज फैलाते हैं, घनी डालियाँ फ़सलों के लिए हवा रोकती हैं, और पत्तियाँ अच्छी हरी खाद बनती हैं।
खेती से आमदनी, सावधानी के साथ. ICFRE-IWST का तकनीकी पैकेज आंवले को साथी पौधा बनाकर चंदन की खेती को 15 साल के चक्र में आर्थिक रूप से फ़ायदेमंद बताता है। ये मॉडल के अनुमान हैं, कोई वादा नहीं: चोरी, रोग, अंदरूनी लकड़ी की अनिश्चित पैदावार, और काटने व बेचने के राज्य के नियम, ये सब तय करते हैं कि उगाने वाले को कितना मिलता है।
पारंपरिक उपयोग. भारत में चंदन के लेप और तेल का पुराना पारंपरिक उपयोग है, और ICRAF बताता है कि तेल दवाओं में भी इस्तेमाल होता है। पारंपरिक उपयोग से यह साबित नहीं होता कि यह किसी बीमारी में काम करता है या सबके लिए सुरक्षित है। चंदन का तेल न निगलें, और कोई भी नुस्ख़ा अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर से बात करें।
- अन्य: ख़ुशबूदार अंदरूनी लकड़ी और तेल: ICRAF के अनुसार तेल इत्र और साबुन बनाने में, और अंदरूनी लकड़ी का पाउडर अगरबत्ती और लेप में इस्तेमाल होता है; ICFRE-IWST के अनुसार तेल सबसे ज़्यादा जड़ में, फिर ज़मीन के पास तने में होता है।
- इमारती लकड़ी: बारीक दानेदार, टिकाऊ और मज़बूत अंदरूनी लकड़ी, जो सजावटी और नक्काशी के काम में आती है (ICRAF)।
- जैव विविधता: पक्षी इसके गूदेदार फल खाते हैं और बीज फैलाते हैं (ICRAF)।
- मिट्टी का स्वास्थ्य: इसकी पत्तियाँ अच्छी हरी खाद बनती हैं (ICRAF)।
- अन्य: घनी डालियाँ हवा रोककर पास की फ़सलों को बचाती हैं (ICRAF)।
- चारा: कभी-कभी चारे के लिए डालियाँ काटी जाती हैं; बकरी, भेड़, गाय और ऊँट पत्तियाँ खाते हैं, इसी वजह से छोटे पौधों को गार्ड चाहिए (ICRAF)।
- औषधीय: भारत में चंदन के लेप और तेल का पुराना पारंपरिक उपयोग है, और ICRAF के अनुसार तेल दवाओं में भी इस्तेमाल होता है। पारंपरिक उपयोग से यह साबित नहीं होता कि यह किसी बीमारी में काम करता है या सबके लिए सुरक्षित है; तेल न निगलें, और कोई भी नुस्ख़ा अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर से बात करें।
- सांस्कृतिक: ICFRE-IWST के अनुसार भारतीयों के धार्मिक जीवन में चंदन की अहम भूमिका है; ICRAF के अनुसार इसका पाउडर घरों और मंदिरों में धूप की तरह जलाया जाता है।
स्रोत: Vikaspedia (Govt of India / C-DAC): Sandalwood (source: Sandalwood Information System, ICFRE-IWST Bengaluru); Viswanath S., Joshi G., Rathore T.S. Technology Package for Raising Sandal Plantations from Quality Planting Material (QPM) Stock of Sandalwood Seedlings. ICFRE-IWST, Bangalore (undated); Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Santalum album (ICRAF / World Agroforestry); ICFRE-IWST Sandalwood Information System: Silviculture (heartwood from about 10-13 years; oil highest in root)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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