12A और 80G पंजीकृतदान पर कर लाभ+91 92264 92263
पौधापवित्र वृक्ष

चंदन (Santalum album): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ

Santalum album

चंदन (Santalum album) एक अर्ध-परजीवी पेड़ है, जो पास लगे साथी (होस्ट) पौधे के बिना नहीं उग सकता। जानिए सही साथी पौधे के साथ इसे कैसे लगाएँ, राजस्थान समेत भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कैसे पहचानें और लाल चंदन से कैसे अलग करें, पहले तीन साल की देखभाल, और क़ानून व चोरी से जुड़ी सावधानियाँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंदन का वैज्ञानिक नाम क्या है, और लाल चंदन का?

चंदन, यानी सफेद चंदन, का वैज्ञानिक नाम Santalum album L. है, और यह चंदन कुल Santalaceae का पेड़ है। लाल चंदन एक अलग पेड़ है: इसका वैज्ञानिक नाम Pterocarpus santalinus L.f. है, और यह मटर कुल Fabaceae का है। अंग्रेज़ी में चंदन को सैंडलवुड, इंडियन सैंडलवुड या ईस्ट इंडियन सैंडलवुड कहते हैं।

चंदन का पेड़ कहां मिलता है, और क्या यह राजस्थान में उग सकता है?

चंदन मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत के सूखे इलाक़ों में उगता है: ICFRE-IWST के अनुसार भारत के चंदन क्षेत्र का 90% से ज़्यादा हिस्सा कर्नाटक और तमिलनाडु में है। राजस्थान में यह जंगल में अपने-आप सिर्फ़ दक्षिण और पूर्व की अरावली पहाड़ियों में, सिरोही से प्रतापगढ़ तक, उगता है, और कई ज़िलों में किसानों ने इसे सिंचाई और साथी पौधों के साथ लगाया है, हालाँकि कुल रकबा अभी छोटा था, लगभग 100 हेक्टेयर (ICFRE, Wood is Good 2021)। पौधे के लिए अपने राज्य के वन विभाग या किसी भरोसेमंद नर्सरी से बीज के स्रोत के बारे में पूछें, और जंगल से कभी पौधे न उखाड़ें।

चंदन का पेड़ कैसे लगाएं?

थैली या रूट-ट्रेनर में उगा पौधा लगाएँ, अच्छा हो कि वह 30-50 सेमी ऊँचा हो और उसका छोटा नर्सरी वाला साथी पौधा अभी साथ हो (ICFRE-IWST), मानसून की शुरुआत में, धूप वाली और अच्छी जल-निकासी वाली जगह पर। हर तरफ़ लगभग 50 सेमी का गड्ढा एक मोटा नियम है; खोदी गई मिट्टी में अच्छी सड़ी कम्पोस्ट मिलाकर भरें और पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह थैली में था। बेर, आंवला, करंज या खेजड़ी जैसा टिकाऊ साथी पौधा उसी गड्ढे में या लगभग 1-2 मीटर दूर लगाएँ (हमारा मोटा नियम), गार्ड लगाएँ, और पानी तभी दें जब मिट्टी कुछ सेंटीमीटर नीचे तक सूखने लगे। दूरी के लिए ICFRE-IWST बाग़ानों में 4 × 4 मीटर रखता है; यह बस एक मोटा शुरुआती अनुमान है, घर, दीवार या बोरवेल से सुरक्षित दूरी नहीं, इसलिए अपने स्थानीय वन या उद्यान विभाग से पूछें। बीज से उगाना ज़्यादा मुश्किल है: ICFRE-IWST किसी झाड़ी की जड़ के पास 4-5 बीज बोता है, और वही झाड़ी साथी पौधे का काम करती है।

चंदन लगाने का सबसे अच्छा समय कब है?

मानसून में, जब बारिश से मिट्टी अच्छी तरह गीली हो जाए। एक अनुमान के तौर पर, राजस्थान, गुजरात और मध्य भारत में यह आमतौर पर जुलाई या अगस्त और दक्षिणी प्रायद्वीप में जून या जुलाई होता है, लेकिन अपने ज़िले में बारिश असल में कब आती है, उसी के हिसाब से लगाएँ। अप्रैल से जून के गर्म, सूखे महीनों में न लगाएँ, और जहाँ पाला पड़ता है वहाँ सर्दी में न लगाएँ।

चंदन को साथी (होस्ट) पौधा क्यों चाहिए, और कौन-सा लगाएँ?

चंदन को साथी पौधा इसलिए चाहिए क्योंकि यह अर्ध-परजीवी है: इसकी जड़ें पास के पौधों की जड़ों से जुड़कर उनसे पानी और पोषक तत्व लेती हैं, और ICFRE-IWST के अनुसार टिकाऊ साथी पौधे के बिना पौधा बौना रह जाता है और आमतौर पर लगभग एक साल में मर जाता है। शुरू में अरहर या छुईमुई जैसा छोटा नर्सरी वाला साथी पौधा रखें, फिर लंबी उम्र वाला साथी पौधा। ICFRE वैज्ञानिकों के अनुसार राजस्थान में बेर, कुमट, बबूल, खेजड़ी, आंवला और कैसुरीना अच्छे साथी पौधे रहे हैं, और ICFRE-IWST करंज, मालाबार नीम और कसौद भी गिनाता है। साथी पौधे की छँटाई करते रहें ताकि वह चंदन के ऊपर कभी छाया न करे।

चंदन पर फूल और फल कब आते हैं, और यह कितनी तेज़ी से बढ़ता है?

चंदन पर अक्सर साल में दो बार फूल आते हैं, मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर में, और ICFRE-IWST के अनुसार पेड़ लगभग 3 साल की उम्र से फूलने लगते हैं; ICFRE-IWST की Wood is Good (2021) पत्रिका का एक लेख जगह और देखभाल के हिसाब से पहले फूल 3-5 साल में और भरपूर फूल-फल 5-8 साल में बताता है। फल छोटे, गोल और पकने पर बैंगनी-काले होते हैं। बढ़त धीमी है: ख़ुशबूदार अंदरूनी लकड़ी आमतौर पर लगभग 10-13 साल में बनना शुरू होती है (ICFRE-IWST)।

चंदन का पेड़ कैसा होता है और इसे कैसे पहचानें?

चंदन पतली, नीचे झुकी टहनियों वाला सदाबहार पेड़ है, जिसकी पतली, अंडाकार पत्तियाँ आमने-सामने जोड़ों में लगती हैं और मोटे तौर पर 3-8 सेमी लंबी होती हैं (ICRAF)। इसके फूल बहुत छोटे, मोटे तौर पर 4-6 मिमी, छोटे गुच्छों में, भूसे जैसे रंग से लेकर लाल या बैंगनी-भूरे होते हैं, और इसके गोल फल, मोटे तौर पर 1 सेमी चौड़े, पककर बैंगनी-काले हो जाते हैं। पुराने पेड़ों की छाल गहरी रंगत की, खुरदरी और गहरी खड़ी दरारों वाली होती है। लाल चंदन अलग दिखता है: उसकी पत्तियाँ संयुक्त होती हैं, आमतौर पर तीन पत्रकों वाली, फूल पीले और फलियाँ गोल, पंखदार (विकासपीडिया)।

क्या चंदन को गमले में उगा सकते हैं?

केवल थोड़े समय के लिए, यह सामान्य सलाह है: नर्सरियाँ छोटे चंदन को गमले वाले साथी पौधे के साथ छोटे बर्तनों में उगाती हैं, लेकिन चंदन लगभग 20 मीटर तक ऊँचा पेड़ बनता है (ICFRE-IWST) और उसे पूरी ज़िंदगी एक जीवित साथी पौधा चाहिए, इसलिए गमला उसे ज़्यादा समय तक नहीं सँभाल सकता। अगर आप छोटे पौधे को एक मौसम के लिए बड़े गमले में रखें, तो उसी गमले में अरहर जैसा छोटा साथी पौधा उगाएँ और अगले मानसून में दोनों को ज़मीन में लगा दें। लंबे समय तक गमले में चंदन उगाने पर हमें कोई स्रोत नहीं मिला।

चंदन के पेड़ की कीमत कितनी होती है?

चंदन के पेड़ की कोई तय कीमत नहीं होती। ICFRE-IWST के बिना तारीख़ वाले तकनीकी पैकेज में उस समय भारत में अंदरूनी लकड़ी का भाव 3,500-5,000 रुपये प्रति किलो बताया गया था, जबकि गुजरात मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड की, अवैध रूप से काटी गई लकड़ी की नीलामी में 2015-2020 के दौरान औसत भाव 1,039 रुपये प्रति किलो रहा (Wood is Good, 2021)। एक पेड़ की क़ीमत उसकी अंदरूनी लकड़ी और तेल पर निर्भर करती है, जिन्हें बनने में दस साल से ज़्यादा लगते हैं, और इस पर कि उसे आपके राज्य के नियमों के तहत क़ानूनी रूप से बेचा जाए, इसलिए प्रति पेड़ कमाई के किसी भी आँकड़े को अनुमान मानें, वादा नहीं। पौधों की कीमत नर्सरी और बीज के स्रोत के हिसाब से बदलती है।

क्या चंदन के पेड़ पर सांप रहते हैं, और क्या इसका कोई हिस्सा ज़हरीला है?

हमें ऐसा कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं मिला जो दिखाए कि साँप चंदन के पेड़ की ओर खिंचते हैं; यह एक पुरानी मान्यता है, जो चंदन से लिपटे साँपों वाले रहीम के दोहे से मशहूर हुई। छाया और छिपने की जगह वाले किसी भी पेड़ की तरह, चंदन के पेड़ पर भी कभी-कभार साँप छिप सकता है, इसलिए उसके आसपास काम करते समय सामान्य सावधानी रखें (सामान्य सलाह)। ज़हरीलेपन की जानकारी कम है: हमें कोई भरोसेमंद जाँचा हुआ आँकड़ा नहीं मिला कि कोई हिस्सा इंसानों या पालतू जानवरों को नुकसान पहुँचाता है या नहीं, इसलिए कोई हिस्सा न खाएँ, बच्चों और पालतू जानवरों को इससे और चंदन के तेल से दूर रखें, और अगर कोई कुछ निगल ले और तबीयत ख़राब लगे तो डॉक्टर को, और पालतू जानवर के लिए पशु-चिकित्सक को दिखाएँ।

स्रोत: Vikaspedia (Govt of India / C-DAC): Sandalwood (source: Sandalwood Information System, ICFRE-IWST Bengaluru); ICFRE-IWST Sandalwood Information System: Nursery Technology; Viswanath S., Joshi G., Rathore T.S. Technology Package for Raising Sandal Plantations from Quality Planting Material (QPM) Stock of Sandalwood Seedlings. ICFRE-IWST, Bangalore (undated); ICFRE-IWST (2021). Wood is Good, Grow More, Use More, Vol. 2 Issue 2 (Hegde & Baloch; Rathore et al.; Gunaga et al.; Gujarat case study; Ray & Mishra); Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Santalum album (ICRAF / World Agroforestry); Vikaspedia: Pterocarpus santalinus (red sanders, lal chandan); Bharat Discovery: Rahim ke dohe (Rahim's couplets); ICFRE-IWST Sandalwood Information System: Habitat (habitat, height, flowering twice a year from 3 years); ICFRE-IWST Sandalwood Information System: Silviculture (heartwood from about 10-13 years; oil highest in root)

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें

GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।

विश्वकोश पर वापस जाएं