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आँवला: जयपुर के लिए एक मज़बूत देशी फलदार पेड़

Phyllanthus emblica

आँवला एक मज़बूत देशी फलदार पेड़ है जो सूखी, कमज़ोर और खारी मिट्टी में भी उग जाता है, जमने के बाद कम पानी माँगता है और हर सर्दी विटामिन C से भरपूर फल देता है। जानिए जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और सँभालें।

जयपुर में आँवला क्यों लगाएँ

यह सूखी ज़मीन के लिए बना है। IGNOU की बागवानी पढ़ाई सामग्री के अनुसार आँवला एक मज़बूत पेड़ है जिसे कम सिंचाई चाहिए। जमे हुए बाग़ को आम तौर पर सामान्य बारिश के अलावा पानी की ज़रूरत नहीं होती।

इसका फल बरसात में बढ़ता है। पेड़ पर मार्च के आख़िर से फूल आते हैं। परागण के बाद छोटा फल पूरी गर्मी सुप्त (रुका हुआ) रहता है, जुलाई के अंत में फिर बढ़ना शुरू करता है, सितंबर में सबसे तेज़ बढ़ता है और नवंबर–दिसंबर तक तैयार हो जाता है। यानी फल का ज़्यादातर विकास तब होता है जब बारिश का पानी मिलता है।

यह कठिन मिट्टी सह लेता है। आँवला हल्की अम्लीय से लेकर खारी या क्षारीय (ऊसर) मिट्टी (pH 6.5–9.5) में उगता है। बहुत ज़्यादा pH पर पोषक तत्वों की कमी दिख सकती है, इसलिए रोपाई के समय थोड़ा ध्यान रखना अच्छा है। इसे भारी मिट्टी, जलभराव और ऊँचा भूजल स्तर पसंद नहीं।

बड़ा होने पर गर्मी झेल लेता है। बड़े पेड़ लगभग 46 °C तक सह लेते हैं, लेकिन छोटे पौधों को छाया चाहिए। जयपुर की गर्मी इससे भी ज़्यादा हो सकती है, इसलिए पहले दो साल छोटे पौधों को छाया दें।

सबसे बड़ा ख़तरा पाला है। राजस्थान में छोटे आँवला पौधों के मुरझाने की घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जिनमें छाल फटना, पत्ते गिरना और पौधा सूखना देखा गया, और इसका कारण पाले की चोट माना गया। पाले के दिनों में छोटे पौधों को पानी दें और ढककर रखें। ठंड की चोट के बाद पेड़ अक्सर अच्छी तरह सँभल जाता है।

सही किस्में चुनें

लोकप्रिय किस्मों में NA-7 (देश में सबसे प्रमुख किस्म, जल्दी और भरपूर, नियमित फल देने वाली), कृष्णा (NA-5), कंचन (NA-4), NA-6 और NA-10 हैं, साथ ही पुरानी किस्में चकैया और बनारसी भी उगाई जाती हैं। ICAR-CIAH ने गोमा ऐश्वर्या किस्म भी जारी की है।

दो या तीन किस्में साथ लगाएँ। आँवले के फूलों को अच्छे फल के लिए दूसरी किस्म के पराग की ज़रूरत होती है, इसलिए अकेला खड़ा पेड़ बहुत कम फल दे सकता है। अच्छी जोड़ियाँ हैं: NA-6 + NA-7 + NA-10, या कंचन + कृष्णा।

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें

GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।

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