आँवला: जयपुर के लिए एक मज़बूत देशी फलदार पेड़
Phyllanthus emblica
आँवला एक मज़बूत देशी फलदार पेड़ है जो सूखी, कमज़ोर और खारी मिट्टी में भी उग जाता है, जमने के बाद कम पानी माँगता है और हर सर्दी विटामिन C से भरपूर फल देता है। जानिए जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और सँभालें।
पहले 3 साल की देखभाल
बरसात (जुलाई–सितंबर)
पानी आम तौर पर बारिश से मिल जाता है; लंबे सूखे अंतराल में ही पानी दें। थाले की निराई करें और ध्यान रखें कि पानी रुके नहीं, क्योंकि आँवले को जलभराव पसंद नहीं। नाइट्रोजन की दूसरी आधी मात्रा जुलाई या अगस्त में दें। छाल खाने वाली इल्ली (कैटरपिलर) पर नज़र रखें, जो तने में सुरंग बनाती है। किसी भी छिड़काव के लिए अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से पूछें कि अभी कौन-सी दवा मान्य है।
बरसात के बाद (अक्टूबर–नवंबर)
हर 10–15 दिन में पानी दें। तने के आसपास पुआल, सूखी पत्तियों या फ़सल के अवशेष की मल्च (परत) बिछाएँ; इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है और केंचुओं को मदद मिलती है। गाँठ (गॉल) बनाने वाले कीड़े से बनी सूजी हुई टहनियाँ काट दें।
सर्दी (दिसंबर–फ़रवरी)
पाले वाली रातों से पहले हल्का पानी दें और पाले के दिनों में छोटे पौधों को ढककर रखें। जनवरी–फ़रवरी में, फूल आने से पहले, गोबर की खाद की पूरी मात्रा, नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फ़ॉस्फ़ोरस व पोटाश की पूरी मात्रा दें। प्रति पेड़ एक अंदाज़ा:
| साल | नाइट्रोजन (N) | फ़ॉस्फ़ोरस (P) | पोटाश (K) | गोबर की खाद |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 100 ग्राम | 50 ग्राम | 100 ग्राम | — |
| 2 | 200 ग्राम | 100 ग्राम | 200 ग्राम | 5 किलो |
| 3 | 300 ग्राम | 150 ग्राम | 300 ग्राम | 10 किलो |
यही समय पेड़ को आकार देने का भी है: शाखाएँ ज़मीन से 0.75–1 मीटर ऊपर से निकलने दें, 2–4 मज़बूत, चौड़े कोण वाली मुख्य शाखाएँ रखें (बाद में 4–6), और मूलवृंत (रूटस्टॉक) से निकलने वाली टहनियाँ हटा दें।
गर्मी (मार्च–जून)
अप्रैल–जून में हर 10–15 दिन में पानी दें: थाले से, ड्रिप से या ज़मीन में गड़े मिट्टी के मटके से। ड्रिप से 40–50% पानी बचता है, और जहाँ पानी कम है वहाँ मटका सिंचाई कारगर रही है। मोटी मल्च बिछाकर रखें और छोटे पौधों को छाया दें। माहू (एफ़िड) लग सकते हैं। अगर फल के अंदर भूरा, मरा हुआ हिस्सा दिखे (इंटरनल फ़्रूट नेक्रोसिस), तो यह बोरॉन की कमी है, जिसे बोरैक्स से ठीक किया जाता है।
पहली 2–3 गर्मियों के बाद पेड़ ज़्यादातर बारिश के पानी पर ही चल जाता है; खाद देने के बाद या लंबे सूखे में हल्का पानी दे सकते हैं।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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