आँवला: भारत का एक मज़बूत देशी फलदार पेड़
Phyllanthus emblica
आँवला एक मज़बूत देशी फलदार पेड़ है जो सूखी, कमज़ोर और खारी मिट्टी में भी उग जाता है, जमने के बाद कम पानी माँगता है और हर सर्दी विटामिन C से भरपूर फल देता है। जानिए भारत में यह कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ और सँभालें।
भारत में आँवला कहाँ उगता है
आँवला दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया का देसी पेड़ है: भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिणी चीन और मलेशिया। भारत में यह ज़्यादातर इलाक़ों में उगाया जाता है:
- उत्तरी मैदान: IGNOU के अनुसार आँवले की खेती सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश में होती है, खारी और बीहड़ ज़मीन वाले ज़िलों में भी, और यह हरियाणा व पंजाब में बढ़ रही है।
- उत्तर-पश्चिम का शुष्क क्षेत्र: सूखी ज़मीन के सबसे मज़बूत फलदार पेड़ों में से एक (नीचे देखें); जुलाई–अगस्त में, या फ़रवरी में लगाया जाता है।
- मध्य भारत: अर्ध-शुष्क बुंदेलखंड में उगाया जाता है और महाराष्ट्र के अर्ध-शुष्क इलाक़ों में फैल रहा है।
- पूर्व, पूर्वी तट और दक्षिणी प्रायद्वीप: ICRAF के अनुसार आँवला सूखे और नम, दोनों तरह के मौसम में अच्छा उगता है, बशर्ते पानी की निकासी अच्छी हो। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के अर्ध-शुष्क इलाक़ों में इसकी खेती बढ़ रही है, और अब यह समुद्र-तट के पास भी उगता है।
- पूर्वोत्तर और पश्चिमी तट (देखभाल के साथ): भारी मिट्टी और ऊँचा जल-स्तर इसे रास नहीं आता, इसलिए इन बहुत बारिश वाले इलाक़ों में केवल ऊँची, अच्छी निकासी वाली ज़मीन पर लगाएँ।
- हिमालय की तलहटी (देखभाल के साथ): 1,800 मीटर ऊँचाई तक और हिमाचल प्रदेश के कंडी क्षेत्र में उगाया जाता है, पर छोटे पौधों को पाला नुकसान करता है, इसलिए यह केवल निचली पहाड़ियों के लिए है।
यह सूखी ज़मीन के लिए बना है। IGNOU की बागवानी पढ़ाई सामग्री के अनुसार आँवला एक मज़बूत पेड़ है जिसे कम सिंचाई चाहिए। जमे हुए बाग़ को आम तौर पर सामान्य बारिश के अलावा पानी की ज़रूरत नहीं होती।
इसका फल बरसात में बढ़ता है। पेड़ पर मार्च के आख़िर से फूल आते हैं। परागण के बाद छोटा फल पूरी गर्मी सुप्त (रुका हुआ) रहता है, जुलाई के अंत में फिर बढ़ना शुरू करता है, सितंबर में सबसे तेज़ बढ़ता है और नवंबर–दिसंबर तक तैयार हो जाता है। यानी फल का ज़्यादातर विकास तब होता है जब बारिश का पानी मिलता है।
यह कठिन मिट्टी सह लेता है। आँवला हल्की अम्लीय से लेकर खारी या क्षारीय (ऊसर) मिट्टी (pH 6.5–9.5) में उगता है। बहुत ज़्यादा pH पर पोषक तत्वों की कमी दिख सकती है, इसलिए रोपाई के समय थोड़ा ध्यान रखना अच्छा है। इसे भारी मिट्टी, जलभराव और ऊँचा भूजल स्तर पसंद नहीं।
बड़ा होने पर गर्मी झेल लेता है। बड़े पेड़ लगभग 46 °C तक सह लेते हैं, लेकिन छोटे पौधों को छाया चाहिए। जहाँ गर्मी इससे भी ज़्यादा पड़ती है, वहाँ पहले दो साल छोटे पौधों को छाया दें।
सबसे बड़ा ख़तरा पाला है। राजस्थान में छोटे आँवला पौधों के मुरझाने की घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जिनमें छाल फटना, पत्ते गिरना और पौधा सूखना देखा गया, और इसका कारण पाले की चोट माना गया। पाले के दिनों में छोटे पौधों को पानी दें और ढककर रखें। ठंड की चोट के बाद पेड़ अक्सर अच्छी तरह सँभल जाता है।
सही किस्में चुनें
लोकप्रिय किस्मों में NA-7 (देश में सबसे प्रमुख किस्म, जल्दी और भरपूर, नियमित फल देने वाली), कृष्णा (NA-5), कंचन (NA-4), NA-6 और NA-10 हैं, साथ ही पुरानी किस्में चकैया और बनारसी भी उगाई जाती हैं। ICAR-CIAH ने गोमा ऐश्वर्या किस्म भी जारी की है।
दो या तीन किस्में साथ लगाएँ। आँवले के फूलों को अच्छे फल के लिए दूसरी किस्म के पराग की ज़रूरत होती है, इसलिए अकेला खड़ा पेड़ बहुत कम फल दे सकता है। अच्छी जोड़ियाँ हैं: NA-6 + NA-7 + NA-10, या कंचन + कृष्णा।
स्रोत: Orwa C. et al. 2009. Agroforestree Database 4.0: Emblica officinalis (ICRAF); IGNOU eGyanKosh, Arid Fruits, Unit 2: Aonla (Emblica officinalis Gaertn); ICAR-CIAH Bikaner, research achievements: released varieties
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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