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पौधाफलदार पेड़

नारियल (Cocos nucifera): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ

Cocos nucifera

नारियल का वैज्ञानिक नाम Cocos nucifera है और यह ताड़ कुल का पेड़ है। जानिए भारत में नारियल का पेड़ कैसे लगाएं: सही मौसम, गड्ढा और पौधा, तीन साल की देखभाल, कितने साल में फल, इसकी पहचान, और यह राजस्थान में अच्छा क्यों नहीं होता।

नारियल कैसे लगाएँ

बारिश शुरू होने पर एक साल का स्वस्थ पौधा बड़े, अच्छी तरह तैयार गड्ढे में लगाएँ, फिर उसे छाया दें, सहारा दें और हर सूखे दौर में पानी दें।

कब लगाएँ

ICAR-CPCRI के अनुसार अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी में पौधे जून में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के साथ लगाए जा सकते हैं, या अक्टूबर–नवंबर में वहाँ, जहाँ मुख्य बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून से आती है; बाढ़ वाली निचली ज़मीन में मानसून ख़त्म होने के बाद लगाएँ। ICAR-CPCRI और TNAU Agritech के आधार पर अनुमान: पश्चिमी तट पर मई–जून, दक्षिण के भीतरी भाग और पूर्वी भारत में जून–जुलाई, और अक्टूबर–नवंबर केवल पूर्वी तट पर, जहाँ मुख्य बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून से आती है, जैसे तमिलनाडु का तट। जब आपके ज़िले में बारिश से मिट्टी अच्छी तरह भीग जाए, तब लगाएँ।

पौधा कैसे चुनें

ICAR-CPCRI लंबी क़िस्म का एक साल का तगड़ा पौधा लेने की सलाह देता है, जो 100 सेमी से ज़्यादा ऊँचा हो, जिसमें 5–6 पत्ते हों और जड़ के ऊपर (कॉलर पर) घेरा लगभग 10 सेमी हो; बौनी क़िस्म का पौधा 80 सेमी से ज़्यादा ऊँचा और 8 सेमी से ज़्यादा घेरे वाला हो (गुणवत्ता जाँचने का अनुमान)। TNAU Agritech के अनुसार ठिगने और टेढ़े-मेढ़े पौधे न लें, और उसकी छाँटे गए पौधों की तस्वीरों में कली सड़न (बड रॉट) वाला पौधा भी है।

नारियल से पौधा तैयार करना

TNAU Agritech के अनुसार पका नारियल बोने के 6–8 हफ़्ते बाद अंकुरित होने लगता है; केवल वही नारियल रखें जो 5 महीने के अंदर अंकुरित हो जाएँ, और 9–12 महीने के पौधे खेत में लगाएँ। ICAR-CPCRI के अनुसार बीज-नारियल खड़ा या करवट (आड़ा) लिटाकर बोया जा सकता है, और देर से बोने पर आड़ा बोने से अंकुरण बेहतर होता है। व्यावहारिक सलाह के तौर पर, इसे हल्की छाया में नम, अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी या रेत में आधा दबा दें, और उसमें पानी कभी भरा न रहने दें।

गड्ढा, दूरी और सुरक्षा

  • गड्ढा: कम भूजल स्तर वाली दोमट मिट्टी के लिए ICAR-CPCRI 1 मीटर × 1 मीटर × 1 मीटर का गड्ढा बताता है, जिसे लगभग 50 सेमी तक ऊपरी मिट्टी से भरा जाए, और नमी बनाए रखने के लिए तले में नारियल की जटा की दो परतें, खोखली तरफ़ ऊपर करके, बिछाई जाएँ; जहाँ भूजल ऊँचा हो, वहाँ सतह पर या मिट्टी के टीले पर लगाएँ। इन्हें अपनी मिट्टी के लिए अनुमान मानें।
  • लगाना: पौधे को बीच में रखें और मिट्टी कसकर दबाएँ, पर कॉलर को मिट्टी से कभी न ढकें और पत्तों के बीच मिट्टी न जाने दें (ICAR-CPCRI)।
  • दूरी: ICAR-CPCRI बाग़ानों में 7.5 × 7.5 मीटर से 8 × 8 मीटर की दूरी बताता है; बग़ीचे में अकेले पेड़ के चारों ओर कम से कम इतनी खुली जगह छोड़ें (हमारा मोटा नियम, घर, दीवार, पाइप या बिजली की लाइन से सुरक्षित दूरी नहीं; अपने स्थानीय उद्यान विभाग या KVK से पूछें)।
  • छाया, सहारा और गार्ड: छोटे पौधे को नारियल या ताड़ के गुँथे पत्तों से छाया दें और हवा से बचाने के लिए डंडे का सहारा दें (ICAR-CPCRI); एक साधारण गार्ड बकरी और गाय से बचाता है (व्यावहारिक सलाह)।

पहले साल पानी (मोटा अनुमान)

कुछ सेंटीमीटर नीचे तक मिट्टी जाँचें और जब जड़ों के पास की मिट्टी सूखने लगे तब गहराई तक पानी दें; बारिश के बाद पानी न दें, और तने के पास कभी पानी भरा न रहने दें। ICAR-CPCRI ने पाया कि सूखी गर्मियों में हर 4 दिन में एक बार पानी देना छोटे पौधों के लिए ठीक रहा; इसे केवल शुरुआती अनुमान मानें, तय समय-सारणी नहीं।

स्रोत: Subramanian P. et al. (2018). Coconut. Technical Bulletin No. 133, ICAR-Central Plantation Crops Research Institute (CPCRI), Kasaragod; TNAU Agritech expert system: Coconut planting seasons and climate; TNAU Agritech expert system: Coconut main field (pits, spacing, shading, irrigation of young palms); TNAU Agritech: Coconut nursery management (seedling selection, germination)

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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