भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS): यह कैसे काम करती है
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम की आसान गाइड: कानून, इसे कौन चलाता है, 490 संस्थाओं के क्षेत्रीय लक्ष्य, ऑफ़सेट व्यवस्था, CERC के कारोबार नियम और PAT से संबंध।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CCTS क्या है?
CCTS भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम है, जो 28 जून 2023 को अधिसूचित हुई और भारतीय कार्बन बाज़ार बनाती है। इसमें बड़े उद्योगों के लिए उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्यों वाली अनिवार्य व्यवस्था और दूसरी संस्थाओं की परियोजनाओं के लिए स्वैच्छिक ऑफ़सेट व्यवस्था है।
भारत के कार्बन बाज़ार की अनिवार्य व्यवस्था में कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
अक्टूबर 2026 तक एल्युमिनियम, सीमेंट, क्लोर-अल्कली, लुगदी और कागज़, पेट्रोलियम रिफ़ाइनरी, पेट्रोकेमिकल, कपड़ा और सेकंडरी एल्युमिनियम के लक्ष्य अधिसूचित हैं, जिनमें 490 बाध्य संस्थाएँ हैं। BEE ने लोहा और इस्पात तथा उर्वरक को आगे जुड़ने वाले क्षेत्रों में गिना है, और लोहा और इस्पात के लिए मसौदा संशोधन जारी किया है।
कार्बन क्रेडिट सर्टिफ़िकेट (CCC) क्या है?
कार्बन क्रेडिट सर्टिफ़िकेट भारतीय कार्बन बाज़ार की इकाई है और एक टन CO2 के बराबर कटौती, हटाव या बचाव को दर्शाता है। BEE केंद्र सरकार की मंज़ूरी से CCC जारी करता है, और Grid-India उन्हें रजिस्ट्री में दर्ज करता है।
भारतीय कार्बन बाज़ार की रजिस्ट्री कौन है?
ग्रिड कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया (Grid-India) रजिस्ट्री है, जबकि BEE प्रशासक है और CERC कारोबार को नियंत्रित करता है। रजिस्ट्री संस्थाओं का पंजीकरण करती है, CCC खाते रखती है और लेन-देन दर्ज करती है।
क्या कोई छोटी कंपनी या MSME CCTS में कार्बन क्रेडिट कमा सकती है?
शायद हाँ, ऑफ़सेट व्यवस्था के ज़रिए, अगर कंपनी की कोई परियोजना किसी मंज़ूर कार्यप्रणाली में फ़िट हो और मान्यता प्राप्त एजेंसी की जाँच और सत्यापन में पास हो। इसमें खर्च और निगरानी लगती है, और क्रेडिट या कमाई की कभी गारंटी नहीं होती।
PAT और CCTS में क्या फ़र्क है?
PAT ने ऊर्जा दक्षता के लक्ष्य तय किए और ऊर्जा बचत प्रमाणपत्रों का कारोबार कराया, जबकि CCTS ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता के लक्ष्य तय करती है और कार्बन क्रेडिट सर्टिफ़िकेट का कारोबार कराती है। BEE कहता है कि PAT धीरे-धीरे CCTS की अनिवार्य व्यवस्था में बदल जाएगी।
भारतीय कार्बन क्रेडिट का कारोबार कहाँ होगा?
CERC कार्बन क्रेडिट सर्टिफ़िकेट विनियम, 2026 के तहत कार्बन क्रेडिट सर्टिफ़िकेट का कारोबार पावर एक्सचेंजों पर होता है, जब तक CERC कोई दूसरा तरीका मंज़ूर न करे। अनुपालन और ऑफ़सेट के अलग बाज़ार हिस्से हैं, और अनुपालन वाले सौदे न्यूनतम और अधिकतम कीमत के बीच होते हैं।
क्या CCTS का लक्ष्य उत्सर्जन की कुल सीमा है?
नहीं, CCTS का लक्ष्य समतुल्य उत्पाद की प्रति इकाई tCO2e में उत्सर्जन तीव्रता का लक्ष्य है, कुल उत्सर्जन की सीमा नहीं। प्लांट उत्पादन बढ़ा सकता है, पर उसे हर इकाई के उत्पादन पर उत्सर्जन घटाना होगा।
स्रोत: Bureau of Energy Efficiency: Indian Carbon Market (CCTS) page; BEE: Detailed Procedure for Compliance Mechanism under the Indian Carbon Market; PIB (MoEFCC), 22 January 2026: Government notifies GHG Emission Intensity Targets for 208 more carbon-intensive industries; PIB (Ministry of Power), 28 March 2025: India's Carbon Offset Plan; PIB (Ministry of Power), 4 December 2025: Framework for CCTS established; PIB (Ministry of Power): Year End Review 2025; PIB (Ministry of Power), 21 March 2026: Prakriti 2026 and Indian Carbon Market Portal launch; CERC (Terms and Conditions for Purchase and Sale of Carbon Credit Certificates) Regulations, 2026; CERC: Current Regulations index; PIB: Cabinet approves India's Nationally Determined Contribution (2031-2035) (25 March 2026)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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