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अर्जुन का पेड़ (Terminalia arjuna): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ

Terminalia arjuna

अर्जुन भारत के नदी-किनारों का बड़ा देसी छायादार पेड़ है, जिसे आयुर्वेद में महत्व दिया गया है। यह भारत के ज़्यादातर हिस्सों में नालों के किनारे और नमी वाली ज़मीन पर उगता है, और नमी वाली, निचली जगह पर लगाने और शुरुआती वर्षों में पानी देने पर सूखे इलाक़ों में भी अच्छा पनप सकता है। जानिए यह कहाँ उगता है, इसे कब और कैसे लगाएँ और किन बातों का ध्यान रखें।

भारत में अर्जुन कहाँ उगता है

मूल क्षेत्र। अर्जुन भारत और श्रीलंका का देसी पेड़ है। ICFRE के अनुसार यह शुष्क (मरुस्थलीय) इलाक़ों को छोड़कर पूरे देश में, हिमालय के समशीतोष्ण इलाक़ों समेत, व्यापक रूप से मिलता है। उप-हिमालयी क्षेत्र और प्रायद्वीपीय भारत में यह नदियों, नालों, बीहड़ों और सूखी जलधाराओं के किनारे आम है, और प्रायद्वीपीय भारत के नदी-किनारे के जंगलों, जैसे मोयार नदी घाटी, में यह एक प्रमुख (कीस्टोन) पेड़ है। ICRAF इसे शुष्क उष्णकटिबंधीय नदी-तटीय जंगलों और नम व शुष्क पर्णपाती जंगलों का, कम ऊँचाई वाला पेड़ बताता है।

क्षेत्र।

  • अच्छा उगता है: उत्तरी मैदान, मध्य भारत, पूर्वी भारत, पूर्वी तट और दक्षिणी प्रायद्वीप।
  • सावधानी के साथ (सूखा): उत्तर-पश्चिम का शुष्क क्षेत्र। इसे केवल नमी वाली, निचली जगह पर लगाएँ और शुरुआती वर्षों में पानी दें। नागरिक-विज्ञान के रिकॉर्ड कोटा और राजस्थान के अन्य ज़िलों में अर्जुन के पेड़ दिखाते हैं।
  • सावधानी के साथ (बहुत बारिश): पूर्वोत्तर और पश्चिमी तट, जहाँ अक्सर इसके 750–1,900 मिमी के दायरे से ज़्यादा बारिश होती है। ICFRE जहाँ पानी रुकता है वहाँ उठे हुए टीलों पर लगाने की सलाह देता है, इसलिए अच्छे जल-निकास वाली ज़मीन चुनें।
  • सावधानी के साथ (पहाड़): हिमालय की तलहटी। ICRAF के अनुसार यह 0–1,200 मीटर ऊँचाई तक उगता है और इसके छोटे पौधे पाले से जल्दी प्रभावित होते हैं, इसलिए केवल गर्म निचली घाटियों में लगाएँ और पहले दो वर्ष छोटे पौधों को बचाएँ।

जलवायु। ICRAF के अनुसार इसे साल में औसतन 750–1,900 मिमी बारिश चाहिए; ICFRE 1,000–1,500 मिमी और 20–33 °C तापमान बताता है। इसे किसी सूखी, पथरीली ढलान पर लगाकर भूल नहीं सकते।

मिट्टी। गहरी, उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी में यह सबसे बड़ा होता है और नालों के किनारे की समतल चिकनी मिट्टी पर अक्सर झुंड में उगता है (ICFRE)। ICRAF के अनुसार यह pH 6.5–7.0 वाली उपजाऊ, उदासीन मिट्टी में, जहाँ पानी भी मिले और निकास भी हो, अच्छा उगता है; ICFRE कम लवणता के साथ pH 5.0–7.0 बताता है।

असली बात जगह चुनने की है। अर्जुन उन निचली जगहों पर सबसे अच्छा पनपता है जहाँ नमी टिकती है: तालाब, जोहड़, वर्षा-जल संचयन के गड्ढे या नालियों के पास। वहाँ यह घनी छाया देता है, किनारों को कटाव से बचाता है और क्षारीय ज़मीन को सुधारने में मदद कर सकता है।

स्रोत: Kew, World Checklist of Vascular Plants (via GBIF): Terminalia arjuna; Orwa C. et al. (2009), ICRAF Agroforestree Database 4.0: Terminalia arjuna; Jui L.A. et al. (2026), Terminalia arjuna under severe water stress, Plants 15(6):888; Biomass production and soil amelioration in a high density Terminalia arjuna plantation on sodic soils, Biomass and Bioenergy (1998); iNaturalist observations of Terminalia arjuna in Rajasthan; Status and ecological significance of Terminalia arjuna in the Moyar River valley, Journal of Wildlife Science; Modern Nursery Techniques: A Manual (Terminalia arjuna: 'widely distributed throughout the country including temperate regions of Himalaya except in arid regions') – Indian Council of Forestry Research and Education (ICFRE)

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

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