अर्जुन का पेड़ (Terminalia arjuna): जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और देखभाल करें
Terminalia arjuna
अर्जुन भारत के नदी-किनारों का बड़ा देसी छायादार पेड़ है, जिसे आयुर्वेद में महत्व दिया गया है। नमी वाली, निचली जगह पर लगाने और शुरुआती वर्षों में पानी देने पर यह जयपुर में अच्छा पनपता है। जानिए इसे कब और कैसे लगाएँ और किन बातों का ध्यान रखें।
पहले तीन साल की देखभाल
मानसून। पहले दो साल थाले की नियमित निराई करें और पेड़ बढ़ने के साथ थाला चौड़ा करें।
अक्टूबर से नवंबर। 7 से 10 सेमी मल्च बिछाएँ। पहले साल हर 7 से 10 दिन, दूसरे साल हर 10 से 14 दिन और तीसरे साल हर 2 से 3 हफ़्ते में पानी दें।
सर्दी। पाले से छोटे पौधे का तना दो-शाखा वाला और झाड़ीनुमा हो सकता है। पहली दो सर्दियों में ठंडी रातों को पौधे को जूट या छप्पर से ढकें।
वसंत। नए पत्ते आते हैं। अगर पाले से तना बँट गया हो, तो छँटाई करके एक मज़बूत मुख्य तना रखें।
गर्मी। यह सबसे नाज़ुक मौसम है। पहले साल हर 3 से 4 दिन, दूसरे साल हर 5 से 7 दिन, और तीसरे साल हर 7 से 10 दिन में गहरा पानी दें।
कीट-रोग। पाउडरी मिल्ड्यू (सफ़ेद फफूंद), पत्ता लपेटने वाले घुन, इल्लियाँ और सफ़ेद मोम-शल्क कीट दिख सकते हैं। ये आमतौर पर मामूली होते हैं; ज़्यादा नुकसान होने पर ही उपचार करें।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye अपनी ज़मीन पर ऐसे ही पेड़ लगाता है। अपने पेड़ को बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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