अर्जुन का पेड़ (Terminalia arjuna): जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और देखभाल करें
Terminalia arjuna
अर्जुन भारत के नदी-किनारों का बड़ा देसी छायादार पेड़ है, जिसे आयुर्वेद में महत्व दिया गया है। नमी वाली, निचली जगह पर लगाने और शुरुआती वर्षों में पानी देने पर यह जयपुर में अच्छा पनपता है। जानिए इसे कब और कैसे लगाएँ और किन बातों का ध्यान रखें।
विषाक्तता
सावधानियाँ और सुरक्षा
- जगह। अर्जुन बड़ा पेड़ बनता है और तना अक्सर नीचे से चौड़ा होता है। इसे इमारतों, दीवारों, सेप्टिक टैंक और पाइपों से कम से कम 8 मीटर दूर रखें।
- उथली जड़ें। इसकी जड़ें उथली होती हैं और चारों ओर फैलती हैं, इसलिए पास का फ़र्श उठा सकती हैं।
- पानी। सूखी, पथरीली, ऊँची जगहों पर बिना सिंचाई के यह मुश्किल से पनपता है।
- पाला। पहली दो सर्दियों में छोटे पौधों को पाले से बचाएँ।
- छाल उतारना। दवा के लिए सार्वजनिक पेड़ों की छाल कभी-कभी अवैध रूप से उतार ली जाती है। इससे पेड़ घायल होता है, इसलिए तने की रक्षा करें।
- विषाक्तता। अर्जुन को विषैला दर्ज नहीं किया गया है, पर इसके कच्चे हिस्सों की सुरक्षा पर कोई भरोसेमंद जानकारी नहीं है, इसलिए कोई भी हिस्सा न खाएँ। इसके पत्ते पशुओं का पारंपरिक चारा हैं; कुत्ते-बिल्लियों के लिए कोई भरोसेमंद जानकारी नहीं है।
अर्जुन भारत का देसी पेड़ है और यहाँ इसे आक्रामक (इनवेसिव) नहीं माना गया है।
ग्रीनआई के साथ किसी के नाम पर अर्जुन लगाइए: एक पेड़ उपहार दें
- मनुष्य
- सत्यापित नहीं — पालतू जानवरों या बच्चों के संपर्क में लाने से पहले जाँच लें
- पालतू और अन्य पशु
- सत्यापित नहीं — पालतू जानवरों या बच्चों के संपर्क में लाने से पहले जाँच लें
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
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