स्कोप 1, 2 और 3 उत्सर्जन क्या हैं: भारतीय कंपनियों के लिए आसान गाइड
GHG प्रोटोकॉल में स्कोप 1, 2 और 3 उत्सर्जन का मतलब, स्कोप 2 के लोकेशन-आधारित और मार्केट-आधारित आँकड़ों का फ़र्क़, स्कोप 3 की 15 श्रेणियाँ, और भारतीय कंपनियों व MSME सप्लायरों से क्या माँगा जा रहा है।
स्कोप 2 क्या है, और लोकेशन-आधारित व मार्केट-आधारित आँकड़े क्या हैं?
स्कोप 2 उस बिजली, भाप, गर्मी या ठंडक को बनाने से होने वाला अप्रत्यक्ष उत्सर्जन है जिसे कंपनी ख़रीदकर इस्तेमाल करती है। कोयला बिजलीघर में जलता है, पर उत्सर्जन ख़रीदार के स्कोप 2 में जाता है क्योंकि उसकी माँग की वजह से यह हुआ।
स्कोप 2 गाइडेंस (2015) दो तरीक़े बताती है:
| तरीक़ा | यह क्या दिखाता है | कौन सा उत्सर्जन कारक (emission factor) |
|---|---|---|
| लोकेशन-आधारित (location-based) | जहाँ बिजली इस्तेमाल हुई, वहाँ के ग्रिड का औसत उत्सर्जन | ग्रिड का औसत कारक (भारत में, CEA CO2 बेसलाइन डेटाबेस से) |
| मार्केट-आधारित (market-based) | वह बिजली जिसे कंपनी ने अनुबंधों के ज़रिए ख़रीदना चुना | अनुबंध वाले साधनों के कारक, जैसे रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफ़िकेट, बिजली ख़रीद समझौते (PPA), ग्रीन टैरिफ़ या सप्लायर के अपने कारक |
जिस कंपनी का काम ऐसे बाज़ारों में है जहाँ ये अनुबंध मिलते हैं, उसे दोनों आँकड़े देने होते हैं, और हर आँकड़े पर साफ़ लेबल होना चाहिए। गाइडेंस इसे "दोहरी रिपोर्टिंग (dual reporting)" कहती है। मार्केट-आधारित आँकड़े में इस्तेमाल होने वाले साधनों को गाइडेंस के स्कोप 2 क्वालिटी मानदंड (Quality Criteria) पूरे करने होते हैं। जहाँ कोई अनुबंध या रेज़िडुअल-मिक्स कारक (residual mix) नहीं है, वहाँ गाइडेंस की डेटा सूची ग्रिड के औसत कारक की इजाज़त देती है।
उदाहरण (सिर्फ़ समझाने के लिए): दोहरी रिपोर्टिंग
एक सॉफ़्टवेयर दफ़्तर साल में 1,000 MWh ग्रिड बिजली इस्तेमाल करता है। वह 400 MWh के रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफ़िकेट ख़रीदता है।
- लोकेशन-आधारित: 1,000 MWh x 0.675 tCO2/MWh = 675 tCO2। यहाँ 0.675 CEA CO2 बेसलाइन डेटाबेस, संस्करण 22.0 (अगस्त 2026) में FY 2025-26 का राष्ट्रीय भारित औसत ग्रिड कारक है। असली सूची में वही CEA संस्करण और वित्त वर्ष लें जो उसके रिपोर्टिंग साल से मेल खाता हो।
- मार्केट-आधारित: सर्टिफ़िकेट वाले 400 MWh x 0 = 0, और बाक़ी 600 MWh x 0.675 = 405 tCO2, यानी जिस हिस्से पर कोई अनुबंध नहीं है उसके लिए ग्रिड का औसत कारक।
पहला आँकड़ा बताता है कि दफ़्तर असल में किस ग्रिड पर है। दूसरा बताता है कि उसकी ख़रीद के फ़ैसलों का क्या असर हुआ। ईमानदार तस्वीर के लिए दोनों ज़रूरी हैं। भारत में ये साधन कैसे काम करते हैं, यह हमारी रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफ़िकेट वाली गाइड में है।
स्रोत: GHG Protocol Corporate Accounting and Reporting Standard (revised edition, 2004); GHG Protocol Scope 2 Guidance (2015); GHG Protocol Corporate Value Chain (Scope 3) Standard (2011); GHG Protocol: public consultations page; GHG Protocol: release opening Scope 2 and electricity-sector consequential consultations; GHG Protocol: key standard development updates FAQ (29 July 2026); GHG Protocol: Scope 3 Standard Revisions Phase 1 Progress Update (March 2026, draft); SEBI: Format of BRSR Core, Annexure I (July 2023); SEBI circular SEBI/HO/CFD/CFD-PoD-1/P/CIR/2025/42 (28 March 2025); Central Electricity Authority, CO2 Baseline Database for the Indian Power Sector, User Guide Version 22.0 (August 2026)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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