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भारत का ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम: नियम, पेड़ लगाना और कार्बन क्रेडिट से अंतर

भारत का ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम क्या है, इसे कौन चलाता है, फ़रवरी 2024 से अगस्त 2025 तक पेड़ लगाने के नियम कैसे बदले, ग्रीन क्रेडिट किस काम आते हैं, और ये कार्बन क्रेडिट क्यों नहीं हैं।

पेड़ लगाने के नियम कैसे बदले हैं?

पहली कार्यप्रणाली: 22 फ़रवरी 2024

22 फ़रवरी 2024 को सरकार ने पेड़ लगाने की पहली कार्यप्रणाली अधिसूचित की, S.O. 884(E)। इसकी मुख्य बातें थीं:

  • राज्य वन विभाग अपने नियंत्रण वाली बिगड़ी हुई ज़मीन की पहचान करेंगे, जिसमें खुला जंगल, झाड़ी वाली ज़मीन, बंजर ज़मीन और जलग्रहण क्षेत्र शामिल हैं।
  • हर ज़मीन का टुकड़ा हर तरह के विवाद या बोझ से मुक्त और कम से कम 5 हेक्टेयर का होना था।
  • आवेदक ICFRE को आवेदन करता, उसे ज़मीन दी जाती, और वह डिमांड नोट के ज़रिए पौधारोपण और प्रशासन का ख़र्च चुकाता।
  • वन विभाग भुगतान के दो साल के अंदर पौधारोपण पूरा करता।
  • क्रेडिट की गणना हर उगाए गए पेड़ पर एक ग्रीन क्रेडिट के हिसाब से होती, बशर्ते घनत्व कम से कम 1,100 पेड़ प्रति हेक्टेयर हो।
  • क्रेडिट को वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत प्रतिपूरक वनीकरण की ज़रूरत पूरी करने के लिए बदला जा सकता था, और ESG लीडरशिप संकेतकों या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) नियमों के तहत रिपोर्टिंग में इस्तेमाल किया जा सकता था।

संशोधित कार्यप्रणाली: 29 अगस्त 2025

सरकार ने 29 अगस्त 2025 को यह तरीक़ा बदला (PIB, 16 मार्च 2026)। बदली हुई व्यवस्था के बारे में सरकार के अपने विवरण के अनुसार:

  • ग्रीन क्रेडिट का दावा तभी हो सकता है, जब कम से कम पांच साल का बहाली का काम पूरा हो जाए और ज़मीन पर पेड़ों की छतरी का घनत्व (canopy density) कम से कम 40% हो जाए, जो "मध्यम घने जंगल" के बराबर है।
  • पौधारोपण में जगह के हिसाब से उपयुक्त देसी (स्थानीय) प्रजातियों का मिश्रण होना चाहिए।
  • क्रेडिट जारी होने से पहले नामित एजेंसी दावे का सत्यापन करती है और ICFRE को रिपोर्ट देती है।
  • निगरानी में छतरी का घनत्व, पेड़ों का बचना और बढ़ना, मिट्टी और नमी का संरक्षण, जैव विविधता, सुरक्षा, रखरखाव और ख़र्च शामिल हैं (ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम FAQ)।
  • बहाल की गई वन भूमि को वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत प्रतिपूरक वनीकरण की ज़रूरत पूरी करने के लिए बदला जा सकता है।

2025 की अधिसूचना पर छपी रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि 1,100 पेड़ प्रति हेक्टेयर का तय नियम हटा दिया गया, कि पांच साल से ज़्यादा उम्र के हर बचे हुए पेड़ पर एक क्रेडिट मिलता है, और कि ये क्रेडिट होल्डिंग कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों के बीच को छोड़कर ख़रीदे-बेचे नहीं जा सकते। पाठक इन बातों को ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम पोर्टल पर अधिसूचना के पाठ से मिला लें, क्योंकि यह लेख लिखते समय 2025 का पूरा पाठ हमें किसी आधिकारिक साइट से नहीं मिल पाया।

स्रोत: Gazette of India: Green Credit Rules, 2023, S.O. 4458(E), MoEFCC, 12 October 2023 (copy hosted by Puducherry DSTE); Gazette of India: S.O. 884(E), Methodology for calculation of Green Credit in respect of Tree Plantation, MoEFCC, 22 February 2024; PIB: Parliament Question, Green Credit Programme (MoEFCC, 16 March 2026); PIB: Notification issued for Green Credit Program (GCP) and Ecomark scheme (MoEFCC, 13 October 2023); PIB: Year End Review 2023, Ministry of Environment, Forest and Climate Change; Green Credit Programme portal: Frequently Asked Questions (ICFRE/MoEFCC); PIB: Parliament Question, Indian Carbon Market (MoEFCC, 9 December 2024); Mongabay India: Green credit rules tweaked to favour canopy cover, remove trade provision (September 2025), secondary source for orientation

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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