बेल का पेड़: जयपुर में लगाने और देखभाल की पूरी जानकारी
Aegle marmelos
बेल एक मज़बूत देशी फलदार पेड़ है जो 48°C की गर्मी, सूखा और खारी मिट्टी झेल लेता है। जानिए जयपुर में इसे कब और कैसे लगाएँ, देखभाल कैसे करें, इसके उपयोग और ज़रूरी सावधानियाँ।
जयपुर में बेल क्यों लगाएँ
तेज़ गर्मी और कम बारिश झेल लेता है। बेल को लगभग −7°C से 48°C तक के तापमान से नुकसान नहीं होता, और यह साल में 570–2,000 मिमी बारिश वाले इलाकों में उगता है, जिसमें जयपुर भी आता है। भारत में इसकी पहचान ऐसे पेड़ की है जो वहाँ भी पनपता है जहाँ दूसरे फलदार पेड़ नहीं टिक पाते।
मुश्किल मिट्टी में भी चलता है। बेल रेतीली, कम उपजाऊ मिट्टी के साथ-साथ पथरीली, खारी और क्षारीय (ऊसर) मिट्टी में भी, लगभग 6 से 8.5 pH तक, उग जाता है।
जमने के बाद कम पानी। बड़े पेड़ों को आम तौर पर नियमित सिंचाई की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि गर्मी में ये पत्ते गिराकर आराम की अवस्था में चले जाते हैं।
इसकी एक कमज़ोरी है: जलभराव। बेल रुके हुए पानी के प्रति बहुत संवेदनशील है। जहाँ बारिश का पानी जमा होता हो, ऐसी नीची जगह पर इसे न लगाएँ।
कौन-सी किस्म?
- गोमा यशी (ICAR-CIAH): बारिश पर निर्भर अर्ध-शुष्क इलाकों में बिना काँटों का रहता है, और राजस्थान में इसकी व्यावसायिक खेती हाल में तेज़ी से बढ़ी है। सार्वजनिक जगहों के लिए यह हमारी पहली पसंद है।
- थार दिव्य, थार नीलकंठ और थार सृष्टि भी अर्ध-शुष्क इलाकों के लिए जारी की गई किस्में हैं।
- NB-5 छोटी किस्म है (3–5 मीटर), जिसके मीठे फल लगभग 0.9–1 किलो के होते हैं। NB-9 मध्यम ऊँचाई (4–6 मीटर) की और फैलने वाली किस्म है।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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