बेल का पेड़: जयपुर में लगाने और देखभाल की पूरी जानकारी
Aegle marmelos
बेल एक मज़बूत देशी फलदार पेड़ है जो 48°C की गर्मी, सूखा और खारी मिट्टी झेल लेता है। जानिए जयपुर में इसे कब और कैसे लगाएँ, देखभाल कैसे करें, इसके उपयोग और ज़रूरी सावधानियाँ।
पहले 3 साल की देखभाल
मानसून (जुलाई–सितंबर)
- बारिश काफ़ी है, पर थाँवले में पानी रुकने न दें।
- निराई करें और पौधे के आसपास की मिट्टी ढीली करें।
- साल भर की खाद जून–जुलाई में दें। पहले साल: प्रति पौधा 5 किलो गोबर की खाद के साथ 50 ग्राम नाइट्रोजन, 25 ग्राम फ़ॉस्फ़ोरस और 50 ग्राम पोटाश; हर साल इसी अनुपात में बढ़ाएँ। ऊसर मिट्टी में 250 ग्राम ज़िंक सल्फ़ेट भी डालें।
- बैक्टीरियल कैंकर पर नज़र रखें: पत्तों पर पानी जैसे धब्बे जो बाद में छेद बन जाते हैं। सही उपचार के लिए अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से सलाह लें।
मानसून के बाद (अक्टूबर–नवंबर)
- हर 10–15 दिन में पानी दें।
- बारिश के बाद थाँवले में लगभग 20 सेमी मोटी जैविक मल्च (पत्तों, भूसे आदि की परत) बिछाएँ।
- आकार देना: तने के नीचे के 75 सेमी हिस्से पर कोई शाखा न रहने दें और 4–6 अच्छी तरह फैली मुख्य शाखाएँ रखें।
सर्दी (दिसंबर–फ़रवरी)
- महीने में एक बार पानी दें।
- पाले वाली रातों में छोटे पौधों को ढक दें। राजस्थान के सूखे इलाकों में पाला पत्तों और कोमल टहनियों को नुकसान पहुँचा सकता है।
- सूखी, आपस में उलझी या बीमार टहनियाँ हटा दें। इसके अलावा बेल को ज़्यादा छँटाई की ज़रूरत नहीं होती।
गर्मी (मार्च–जून)
- छोटे पौधों को हर 10–15 दिन में पानी दें और मल्च बनी रहने दें।
- सूखे मौसम में पत्ते झड़ेंगे। यह सामान्य है, इसका मतलब यह नहीं कि पेड़ सूख रहा है।
- मई–जून में नए पत्तों पर लीफ़ माइनर और पत्ते खाने वाली इल्लियों की जाँच करें। कुल मिलाकर बेल में कीट और रोग कम ही लगते हैं।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
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