बरगद का पेड़: जयपुर में भारत के राष्ट्रीय वृक्ष को कैसे लगाएँ और सँभालें
Ficus benghalensis
बरगद (Ficus benghalensis) एक विशाल, लंबी आयु वाला छायादार पेड़ है, जिसकी हवाई जड़ें नए तने बन जाती हैं। जानिए जयपुर में इसे कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और इसे खुली जगह क्यों चाहिए।
विषाक्तता
सावधानियाँ और सुरक्षा
- आकार। यही सबसे बड़ा मुद्दा है। बरगद वहीं लगाएँ जहाँ यह पीढ़ियों तक 25 मीटर या उससे ज़्यादा फैल सके। ICRAF के एग्रोफ़ॉरेस्ट्री डेटाबेस के अनुसार अपने विशाल आकार और फैली जड़ों के कारण यह शहरी जगहों के लिए उपयुक्त नहीं है।
- जड़ें और इमारतें। बरगद अक्सर दीवारों या दूसरे पेड़ों पर उग आता है और उन्हें तोड़ या जकड़ सकता है। इसे मकान, दीवार, बोरवेल, टंकी और पाइप से काफ़ी दूर रखें।
- हवाई जड़ों को जगह चाहिए। इसे रास्तों या सड़कों के किनारे न लगाएँ, जहाँ जड़ें काटनी पड़ें।
- सफ़ेद दूध (लेटेक्स)। इसका सफ़ेद रस त्वचा और आँखों में जलन कर सकता है। छँटाई करते समय दस्ताने पहनें।
- पालतू जानवर। अमेरिकी संस्था ASPCA फ़ाइकस (Ficus) प्रजातियों को कुत्तों, बिल्लियों और घोड़ों के लिए विषैला मानती है। यह पूरे अंजीर समूह के लिए सामान्य चेतावनी है, बरगद पर अलग से किया गया अध्ययन नहीं।
- स्थायी ज़िम्मेदारी। बरगद काटना या बहुत ज़्यादा छाँटना सामाजिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, और यह पेड़ लगाने वालों से कहीं ज़्यादा जीता है। ऐसी ज़मीन चुनें जहाँ यह सौ साल या उससे ज़्यादा समय तक रह सके।
IUCN रेड लिस्ट में बरगद कम चिंता (Least Concern) की श्रेणी में है, और यह भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी पेड़ है।
GreenEye के साथ किसी के नाम पर बरगद लगाइए: पेड़ उपहार में दें
- मनुष्य
- हल्का विषैला
प्रभावित भाग: latex, sap
- पालतू और अन्य पशु
- हल्का विषैला
प्रभावित पशु: बिल्लियाँ, कुत्ते, घोड़े
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye अपनी ज़मीन पर ऐसे ही पेड़ लगाता है। अपने पेड़ को बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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