बरगद का पेड़: जयपुर में भारत के राष्ट्रीय वृक्ष को कैसे लगाएँ और सँभालें
Ficus benghalensis
बरगद (Ficus benghalensis) एक विशाल, लंबी आयु वाला छायादार पेड़ है, जिसकी हवाई जड़ें नए तने बन जाती हैं। जानिए जयपुर में इसे कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और इसे खुली जगह क्यों चाहिए।
पहले तीन साल की देखभाल
ये जयपुर की परिस्थितियों के लिए व्यावहारिक सुझाव हैं।
- मानसून (जुलाई से सितंबर): थाले की निराई करें और तेज़ बारिश के बाद उसकी मरम्मत करें। तीसरे साल जड़ें फैलने पर थाला चौड़ा कर दें।
- मानसून के बाद (अक्टूबर से नवंबर): 8 से 10 सेमी मोटी पलवार (मल्च) बिछाएँ, पर तने से दूर रखें। पहले साल हर हफ़्ते, दूसरे साल हर 10 दिन, और तीसरे साल सूखा हो तो हर 2 से 3 हफ़्ते पानी दें।
- सर्दी (दिसंबर से जनवरी): जयपुर में पाला कम पड़ता है, पर पड़ता है; यहाँ का न्यूनतम रिकॉर्ड −2.2 °C है। पहली दो सर्दियों में शीतलहर की चेतावनी वाली रातों में छोटे पौधे को ढक दें।
- वसंत (फ़रवरी से मार्च): स्केल कीट, मिलीबग और थ्रिप्स की जाँच करें। दूसरे साल हल्की छँटाई करें: एक मज़बूत मुख्य तना रखें और आपस में उलझती टहनियाँ हटा दें। तीसरे साल नीचे की शाखाएँ धीरे-धीरे हटाकर छतरी ऊपर उठाएँ।
- गर्मी (अप्रैल से जून): यह सबसे कठिन मौसम है। पहले साल हफ़्ते में दो बार, दूसरे साल हफ़्ते में एक बार, और तीसरे साल हर दो हफ़्ते पानी दें। पलवार दोबारा बिछाएँ, और पत्ते झुलसें तो दक्षिण-पश्चिम की ओर शेड-नेट लगा दें।
- पूरे साल: तने के निचले हिस्से पर दीमक देखते रहें, और जब तक तना जानवरों की पहुँच से ऊपर न हो जाए, ट्री-गार्ड लगा रहने दें। आगे चलकर, जहाँ जगह हो, कुछ हवाई जड़ों को ज़मीन तक पहुँचने दें।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye अपनी ज़मीन पर ऐसे ही पेड़ लगाता है। अपने पेड़ को बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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