बरगद का पेड़: जयपुर में भारत के राष्ट्रीय वृक्ष को कैसे लगाएँ और सँभालें
Ficus benghalensis
बरगद (Ficus benghalensis) एक विशाल, लंबी आयु वाला छायादार पेड़ है, जिसकी हवाई जड़ें नए तने बन जाती हैं। जानिए जयपुर में इसे कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और इसे खुली जगह क्यों चाहिए।
बरगद कैसे लगाएँ
कब लगाएँ
जयपुर में सबसे अच्छा समय जुलाई से मध्य अगस्त है, मानसून की पहली अच्छी बारिश के तुरंत बाद। जयपुर में मानसून आमतौर पर जून के आख़िर से मध्य सितंबर तक रहता है, और जल्दी लगाने से जड़ों को सूखे महीनों से पहले बढ़ने का पूरा मौसम मिल जाता है। फ़रवरी से मार्च की शुरुआत दूसरा विकल्प है, पर तभी जब अप्रैल से जून की गर्मी में नियमित पानी देने का पक्का इंतज़ाम हो। व्यावहारिक सलाह यह है कि अप्रैल से जून और दिसंबर से जनवरी में न लगाएँ।
पौधा कैसा चुनें
बरगद बीज, एयर-लेयरिंग (गूटी) या कलम से उगाया जा सकता है। बीज अच्छे से अंकुरित होते हैं, पर छोटी कलमें मुश्किल से जड़ पकड़ती हैं (केरल के एक परीक्षण में केवल 18 से 20% बचीं), जबकि गूटी अच्छी तरह सफल होती है। व्यवहार में, नर्सरी से लगभग 1 से 1.5 मीटर ऊँचा, 12 से 18 महीने पुराना, बड़ी पॉलीथीन थैली वाला पौधा लें।
गड्ढा और जगह
- लगभग 60 × 60 × 60 सेमी का गड्ढा खोदें; जहाँ नीचे सख़्त कंकड़ (कंकर) की परत हो, वहाँ 90 सेमी से 1 मीटर गहरा।
- खोदी गई मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें, और पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह नर्सरी की थैली में था।
- बारिश का पानी रोकने के लिए पौधे के चारों ओर 1 से 1.5 मीटर चौड़ा उथला थाला (बेसिन) बनाएँ। यह काज़री (CAZRI) जोधपुर की सूखे इलाक़ों वाली सूक्ष्म-जलग्रहण पद्धति पर आधारित है।
- पेड़ को दूसरे बड़े पेड़ों से और मकान, दीवार, बोरवेल, टंकी व पाइपलाइन से कम से कम 20 से 25 मीटर दूर रखें। खुले खेत के बीच अकेली जगह सबसे अच्छी है।
- ट्री-गार्ड ज़रूर लगाएँ। बकरियाँ, गाय-भैंस और नीलगाय इसके पत्ते चाव से खाती हैं।
पहले साल की सिंचाई (व्यावहारिक सलाह)
मिट्टी की नमी देखकर पानी घटाएँ-बढ़ाएँ, और पानी को जमा न होने दें।
| मौसम | कितनी बार | हर बार कितना |
|---|---|---|
| मानसून (जुलाई से सितंबर) | केवल 7 से 10 दिन सूखा रहने पर | 10 से 15 लीटर |
| मानसून के बाद (अक्टूबर से नवंबर) | हफ़्ते में एक बार | 15 से 20 लीटर |
| सर्दी (दिसंबर से फ़रवरी) | हर 10 से 14 दिन, सुबह के समय | 10 से 15 लीटर |
| वसंत (मार्च) | हफ़्ते में एक बार | 20 लीटर |
| गर्मी (अप्रैल से जून) | हफ़्ते में दो बार | 20 से 25 लीटर |
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
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