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पौधादेशी पेड़पवित्र वृक्ष

बरगद का पेड़: भारत में कहाँ उगता है और राष्ट्रीय वृक्ष को कैसे लगाएँ और सँभालें

Ficus benghalensis

बरगद (Ficus benghalensis), जिसे अंग्रेज़ी में बनियन ट्री कहते हैं, भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है: एक विशाल, लंबी आयु वाला छायादार पेड़, जिसकी हवाई जड़ें नए तने बन जाती हैं। जानिए इसे कैसे पहचानें, भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और इसे खुली जगह क्यों चाहिए।

बरगद कैसे लगाएँ

बरगद को मानसून की पहली अच्छी बारिश के तुरंत बाद नर्सरी के स्वस्थ पौधे के रूप में ऐसी खुली ज़मीन में लगाएँ जहाँ यह पीढ़ियों तक बहुत दूर तक फैल सके।

कब लगाएँ

मानसून की पहली अच्छी बारिश के तुरंत बाद लगाएँ, ताकि जड़ों को सूखे महीनों से पहले बढ़ने का पूरा मौसम मिल जाए। उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र, उत्तरी मैदानों और मध्य भारत में इसका मतलब है जुलाई से मध्य अगस्त; पूर्वी भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में जून से अगस्त; पश्चिमी तट पर जून से जुलाई; पूर्वोत्तर में मई से जुलाई; और पूर्वी तट पर जुलाई से अगस्त, या जहाँ मुख्य बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है वहाँ अक्टूबर से नवंबर। ये महीने केवल मार्गदर्शन हैं: अपने ज़िले में बारिश असल में आने पर लगाएँ, और शक हो तो वन या बागवानी विभाग से पूछें। उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र में फ़रवरी से मार्च की शुरुआत दूसरा विकल्प है, पर तभी जब अप्रैल से जून की गर्मी में नियमित पानी देने का पक्का इंतज़ाम हो। मानसून से पहले के गर्म महीनों और कड़ी सर्दी में न लगाएँ।

पौधा कैसा चुनें

ज़्यादातर लोगों के लिए स्वस्थ नर्सरी पौधा सबसे आसान है: बड़ी पॉलीथीन थैली वाला लगभग 1 से 1.5 मीटर ऊँचा पौधा लें। बरगद के बीज बहुत छोटे होते हैं; TNAU के अनुसार इनसे बहुत कम पौधे आगे बढ़कर जम पाते हैं, और इन्हें बारीक रेतीली क्यारी और सावधानी से पानी चाहिए। छोटी कलमें मुश्किल से जड़ पकड़ती हैं (केरल के एक अध्ययन में 18 से 20% बचीं), जबकि वनकर्मी खेत में 8 से 10 फ़ुट लंबी मोटी कलमें लगाते हैं, जो एक विशेष तरीका है।

गड्ढा और जगह

  • जड़ों की पिंडी के लिए काफ़ी चौड़ा, लगभग 60 × 60 × 60 सेमी का गड्ढा खोदें। नीचे सख़्त कंकड़ (कंकर) की परत मिले, तो और गहरा करने से पहले देखें कि पानी निकलता है या नहीं; ख़राब निकास वाली ज़मीन में गहरा गड्ढा बस पानी जमा करता है।
  • खोदी गई मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें, और पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह नर्सरी की थैली में था।
  • बारिश का पानी रोकने के लिए पौधे के चारों ओर 1 से 1.5 मीटर चौड़ा उथला थाला (बेसिन) बनाएँ। यह काज़री (CAZRI) जोधपुर की सूखे इलाक़ों वाली सूक्ष्म-जलग्रहण पद्धति पर आधारित है।
  • पौधे से पहले जगह तय करें। मोटे तौर पर इसे दूसरे बड़े पेड़ों से और मकान, दीवार, बोरवेल, टंकी व पाइपलाइन से लगभग 20 से 25 मीटर दूर रखें। यह हमारी व्यावहारिक सलाह है, कोई इंजीनियरिंग मानक नहीं: ज़मीन के नीचे पाइप और केबल कहाँ से जाते हैं, यह जाँचें, और किसी भी ढाँचे के पास लगाने से पहले जगह के हिसाब से सलाह लें। खुले खेत के बीच अकेली जगह सबसे अच्छी है।
  • ट्री-गार्ड ज़रूर लगाएँ। बकरियाँ, गाय-भैंस और नीलगाय इसके पत्ते चाव से खाती हैं।

पहले साल की सिंचाई (व्यावहारिक सलाह)

लगाने के बाद पौधे को अच्छी तरह पानी दें। नीचे की मात्राएँ गर्म, सूखे इलाक़ों के लिए शुरुआती अंदाज़ा हैं, किसी परीक्षण के नतीजे नहीं: हर बार पानी देने से पहले जड़ों की पिंडी के आसपास मिट्टी जाँचें, मिट्टी सूखने लगे तब पानी दें, रेतीली मिट्टी ज़्यादा बार जाँचें, बारिश के बाद कम पानी दें, और तने के पास पानी जमा न होने दें।

मौसमकितनी बारहर बार कितना
मानसून (जुलाई से सितंबर)केवल 7 से 10 दिन सूखा रहने पर10 से 15 लीटर
मानसून के बाद (अक्टूबर से नवंबर)हफ़्ते में एक बार15 से 20 लीटर
सर्दी (दिसंबर से फ़रवरी)हर 10 से 14 दिन, सुबह के समय10 से 15 लीटर
वसंत (मार्च)हफ़्ते में एक बार20 लीटर
गर्मी (अप्रैल से जून)हफ़्ते में दो बार20 से 25 लीटर

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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