कार्बन फ़ुटप्रिंट क्या है?
कार्बन फ़ुटप्रिंट क्या है, इसमें क्या शामिल होता है, औसत भारतीय का फ़ुटप्रिंट कितना है, और यह संख्या क्या बताती है और क्या नहीं, इसकी आसान जानकारी।
एक परिवार के कार्बन फ़ुटप्रिंट में क्या-क्या आता है?
आम लोगों के लिए
एक परिवार के फ़ुटप्रिंट के आमतौर पर पाँच बड़े हिस्से होते हैं:
- घर की बिजली: पंखे, बल्ब, फ़्रिज, AC, पानी की मोटर। भारत में ग्रिड की ज़्यादातर बिजली अब भी कोयले से बनती है, इसलिए हर यूनिट (kWh) का फ़ुटप्रिंट ठीक-ठाक होता है।
- खाना पकाने का ईंधन: LPG, पाइप वाली प्राकृतिक गैस, मिट्टी का तेल, लकड़ी या बिजली।
- आना-जाना: स्कूटर, कार, बस, रेल और हवाई जहाज़।
- भोजन: वह कैसे उगाया, तैयार किया, ढोया और बर्बाद किया जाता है।
- खरीदा गया सामान: कपड़े, फ़ोन, फ़र्नीचर, मकान बनाने का सामान और सेवाएँ।
उदाहरण (केवल समझाने के लिए, यह कोई माप नहीं है): एक परिवार महीने में 250 kWh ग्रिड बिजली और महीने में 14.2 kg का एक LPG सिलेंडर इस्तेमाल करता है।
| चीज़ | साल भर का इस्तेमाल | इस्तेमाल किया गया उत्सर्जन कारक | साल भर में लगभग CO2 |
|---|---|---|---|
| ग्रिड बिजली | 3,000 kWh | 0.675 kg CO2 प्रति kWh (CEA CO2 Baseline Database, संस्करण 22.0, अगस्त 2026, FY 2025-26 का भारित औसत) | लगभग 2,025 kg |
| LPG | 12 सिलेंडर = 170.4 kg | लगभग 2.98 kg CO2 प्रति kg LPG (IPCC 2006 दिशानिर्देश, खंड 2, डिफ़ॉल्ट नेट कैलोरिफ़िक मान 47.3 TJ/Gg और कार्बन कारक 63,100 kg CO2/TJ) | लगभग 510 kg |
| इन दो चीज़ों का कुल | लगभग 2.5 टन |
इसमें केवल बिजली और रसोई गैस गिनी गई है। आना-जाना, भोजन और खरीदारी इसे और बढ़ाएँगे। ग्रिड में सौर और पवन बिजली बढ़ने के साथ बिजली का कारक हर साल बदलता है, इसलिए अपना हिसाब लगाते समय हमेशा CEA का नया संस्करण इस्तेमाल करें।
व्यवसायों के लिए
कंपनियाँ आमतौर पर अपना फ़ुटप्रिंट GHG Protocol Corporate Standard में बताए गए तीन "स्कोप (scope)" में बाँटकर बताती हैं:
- स्कोप 1: कंपनी के अपने या उसके नियंत्रण वाले स्रोतों से प्रत्यक्ष उत्सर्जन, जैसे बॉयलर, भट्टी, डीज़ल जनरेटर और कंपनी की गाड़ियाँ।
- स्कोप 2: कंपनी द्वारा खरीदी गई बिजली, भाप या गर्मी से परोक्ष उत्सर्जन।
- स्कोप 3: वैल्यू चेन (value chain) का बाकी सारा परोक्ष उत्सर्जन, जैसे खरीदा गया कच्चा माल, सप्लायरों का माल ढुलाई, व्यावसायिक यात्रा, कर्मचारियों का दफ़्तर आना-जाना और बेचे गए उत्पादों का इस्तेमाल।
कई व्यवसायों में स्कोप 3 सबसे बड़ा हिस्सा होता है। स्कोप 1, 2 और 3 उत्सर्जन पर हमारा लेख हर एक को विस्तार से समझाता है।
स्रोत: IPCC AR6 Working Group III, Annex I: Glossary (2022); IPCC AR6 Working Group III, Summary for Policymakers (2022); Our World in Data, CO2 emissions per capita (Global Carbon Budget 2025); Our World in Data, India CO2 country profile; MoEFCC, India First Biennial Transparency Report (BTR-1) to the UNFCCC; MoEFCC, India Fourth Biennial Update Report (BUR-4), December 2024; 2006 IPCC Guidelines for National Greenhouse Gas Inventories, Volume 2, Chapter 1; GHG Protocol Corporate Accounting and Reporting Standard (Revised Edition); SEBI circular on Business Responsibility and Sustainability Reporting, May 2021; Central Electricity Authority, CO2 Baseline Database for the Indian Power Sector, User Guide Version 22.0 (August 2026)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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