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पेड़ कार्बन कैसे जमा करते हैं, और हर पेड़ का कोई तय आँकड़ा क्यों नहीं होता?

पेड़ हवा से CO2 लेकर कार्बन को लकड़ी, जड़ों और मिट्टी में बंद कर देते हैं। जानिए यह कैसे होता है, भारत जंगल का कार्बन कैसे मापता है, हर पेड़ के आँकड़े इतने अलग क्यों होते हैं, और स्थायित्व क्यों ज़रूरी है।

हर पेड़ के कार्बन आँकड़े इतने अलग क्यों होते हैं?

आपने ऐसे दावे देखे होंगे कि "एक पेड़ साल में X kg CO2 सोखता है"। ऐसे आँकड़े किसी ख़ास जगह पर मापी गई किसी ख़ास प्रजाति से आते हैं, और दूसरी जगह ठीक से लागू नहीं होते। मुख्य कारण:

  • प्रजाति और लकड़ी का घनत्व। घनी कठोर लकड़ी हर घन मीटर में हल्की नरम लकड़ी से ज़्यादा कार्बन रखती है।
  • उम्र। छोटा पौधा बहुत कम जमा करता है। बढ़त आम तौर पर बीच के सालों में सबसे तेज़ होती है और पेड़ के परिपक्व होने पर धीमी हो जाती है। IPCC (AR6 कार्य समूह III, अध्याय 12, 2022) बताती है कि जंगल के परिपक्व होने पर कार्बन पृथक्करण धीमा होता है।
  • जगह और मौसम। मिट्टी की गहराई, पानी, बारिश, गर्मी और खरपतवार से होड़ बढ़त को बहुत बदल देते हैं।
  • देखभाल। पहले कुछ सालों में पानी, चराई और आग से बचाव, और निराई तय करते हैं कि पौधा पेड़ बनेगा या नहीं।
  • बचे रहना। जो पौधा मर जाता है वह कुछ भी स्थायी जमा नहीं करता। अलग-अलग पौधारोपण में बचने की दर बहुत अलग होती है।
  • बाद में क्या होता है। अगर पेड़ काटकर जला दिया जाए तो कार्बन हवा में लौट जाता है। अगर लकड़ी टिकाऊ फ़र्नीचर या शहतीर बने, तो कुछ कार्बन ज़्यादा समय तक जमा रहता है।

इन सब कारणों से एक पेड़ हर साल CO2 के तय किलोग्राम के बराबर नहीं होता।

स्रोत: 2006 IPCC Guidelines for National Greenhouse Gas Inventories, Volume 4 (AFOLU), Chapter 4 Forest Land; 2006 IPCC Guidelines, Volume 4, Chapter 2 Generic methodologies (carbon pools, gain-loss and stock-difference methods); 2019 Refinement to the 2006 IPCC Guidelines, Volume 4, Chapter 4 Forest Land; PIB, Union Minister Bhupender Yadav releases India State of Forest Report 2023 (December 2024); PIB backgrounder, India's Green Recovery: Forest and Tree Cover Grows (27 December 2024); Forest Survey of India, India State of Forest Report 2023, Volume I; PIB, Carbon stock in India increases by 79.4 million tonnes (ISFR 2021); IPCC AR6 Working Group III, Summary for Policymakers (2022); IPCC AR6 Working Group III, Chapter 12 Cross-sectoral perspectives (2022); India's Intended Nationally Determined Contribution (2015), UNFCCC NDC Registry; GHG Protocol, Corporate Accounting and Reporting Standard (Revised Edition); Verra, VCS AFOLU Non-Permanence Risk Tool; UNFCCC: India's Updated First Nationally Determined Contribution under Paris Agreement (2021-2030), August 2022; UNFCCC: India's Nationally Determined Contribution (2031-2035), April 2026

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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