ग्रीनहाउस गैसें और CO2 समतुल्य (CO2e) क्या हैं?
कौन सी गैसें धरती को गर्म करती हैं, CO2 समतुल्य और ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल कैसे काम करते हैं, रिपोर्टें अलग GWP मान क्यों लेती हैं, और भारत का उत्सर्जन कहाँ से आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आसान शब्दों में CO2e क्या है?
CO2e, यानी कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य, एक साझा इकाई है जो बताती है कि ग्रीनहाउस गैसों का मिश्रण कितनी गर्मी पैदा करता है, उसे कार्बन डाइऑक्साइड की उतनी मात्रा के रूप में लिखकर जो लगभग उतनी ही गर्मी पैदा करे। उदाहरण के लिए, IPCC AR6 के 100 साल वाले मान से 1 टन गैर-जीवाश्म मीथेन लगभग 27 टन CO2e है।
CO2 और CO2e में क्या अंतर है?
CO2 एक गैस है, कार्बन डाइऑक्साइड, जबकि CO2e एक इकाई है जो सभी ग्रीनहाउस गैसों को कार्बन डाइऑक्साइड के गर्मी वाले असर में बदलकर जोड़ती है। केवल CO2 में दिए गए फ़ुटप्रिंट में मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और फ़्लोरीन वाली गैसें छूट जाती हैं।
कौन सी ग्रीनहाउस गैस सबसे ज़्यादा ग्लोबल वार्मिंग करती है?
कुल मिलाकर इंसानों से होने वाली सबसे ज़्यादा गर्मी कार्बन डाइऑक्साइड से होती है, क्योंकि यह सबसे बड़ी मात्रा में निकलती है और इसका एक हिस्सा सदियों तक हवा में रहता है। भारत में 2022 के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में इसका हिस्सा 78.9% था (BTR-1, MoEFCC)।
क्या मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड से ज़्यादा खराब है?
किलो के हिसाब से मीथेन कहीं ज़्यादा गर्मी रोकती है: IPCC AR6 के अनुसार 100 साल में लगभग 27 से 30 गुना और 20 साल में लगभग 80 गुना। पर यह हवा में केवल लगभग 12 साल रहती है और इसकी बहुत कम मात्रा निकलती है, इसलिए कुल गर्मी अब भी कार्बन डाइऑक्साइड से ज़्यादा होती है।
IPCC के अनुसार मीथेन की GWP कितनी है?
IPCC की छठी आकलन रिपोर्ट (AR6, 2021) में मीथेन की 100 साल की GWP गैर-जीवाश्म स्रोतों के लिए 27.0 और जीवाश्म स्रोतों के लिए 29.8 है। पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय रिपोर्टों में अब भी AR5 का पुराना मान 28 इस्तेमाल होता है, और भारत की BUR-4 में AR2 का मान 21 इस्तेमाल हुआ था।
क्या जलवाष्प एक ग्रीनहाउस गैस है?
हाँ, जलवाष्प एक ग्रीनहाउस गैस है और ग्रीनहाउस प्रभाव का सबसे बड़ा प्राकृतिक हिस्सा है, पर यह कारण के बजाय फ़ीडबैक की तरह काम करती है। दूसरी गैसों से हवा गर्म होने पर इसकी मात्रा बढ़ती है, इसलिए इसे उत्सर्जन सूची में नहीं गिना जाता।
क्या AC ग्रीनहाउस गैसें छोड़ता है?
हाँ, दो तरह से: भारत में इसकी बिजली ज़्यादातर कोयले से बनती है, और इसकी रेफ़्रिजरेंट गैस, जो अक्सर HFC होती है, रिसने पर एक ताकतवर ग्रीनहाउस गैस है। उदाहरण के लिए, IPCC AR6 के 100 साल वाले मान से 1 kg HFC-32, 771 kg CO2e के बराबर है।
रिपोर्टों में कार्बन और कार्बन डाइऑक्साइड में क्या अंतर है?
कार्बन (C) केवल कार्बन के परमाणु गिनता है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) पूरा अणु गिनती है, इसलिए 1 टन कार्बन लगभग 3.67 टन CO2 के बराबर है। वनों और मिट्टी के अध्ययन अक्सर कार्बन में बताते हैं, इसलिए उत्सर्जन से तुलना करने से पहले बदल लें।
स्रोत: IPCC AR6 Working Group I, Summary for Policymakers (2021); IPCC AR6 Working Group I, Chapter 7: The Earth's Energy Budget, Climate Feedbacks and Climate Sensitivity (2021); IPCC AR6 Working Group III, Annex I: Glossary (2022); GHG Protocol, IPCC Global Warming Potential Values, Version 2.0 (August 2024); MoEFCC, India First Biennial Transparency Report (BTR-1) to the UNFCCC; MoEFCC, India Fourth Biennial Update Report (BUR-4), December 2024; UNFCCC Decision 18/CMA.1, Modalities, procedures and guidelines for the transparency framework; UNFCCC Decision 5/CMA.3, Guidance for operationalizing the modalities, procedures and guidelines for the enhanced transparency framework; Press Information Bureau / PM India: Cabinet approves ratification of Kigali Amendment to the Montreal Protocol (August 2021); 2006 IPCC Guidelines for National Greenhouse Gas Inventories, Volume 2, Chapter 1
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
क्या आप जानना चाहते हैं कि यह आपके घर या कंपनी पर कैसे लागू होता है?
हमसे बात करें। हम आसान शब्दों में समझाएंगे कि इसका आपके लिए क्या मतलब है। हम कार्बन क्रेडिट नहीं बेचते और किसी नतीजे का वादा नहीं कर सकते, लेकिन इसे समझने में आपकी मदद कर सकते हैं।
हमसे बात करेंयह लेख शेयर करें




